छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा खुमान साव

छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के भीष्म पितामाह खुमान साव का आज दोपहर को उनके गृह गांव ठेकवा में अंतिम संस्कार किया गया। श्री साव का बीती रात को ठेकवा के उनके पैतृक निवास में निधन हो गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा श्री खुमान साव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि यह दुखद समाचार सुनकर मन व्यथित है। संगीत नाटक अकादमी द्वारा सम्मानित पेशे से शिक्षक श्री खुमान साव लोक सांस्कृतिक मंच ‘चंदैनी गोंदा’ के माध्यम से आजीवन छत्तीसगढ़ की लोक गीत एवं संगीत को सहेजने और संवारने में लगे रहे।
खुमान साव का जन्म 5 सितंबर 1929 को राजनाँदगाँव जिले में हुआ था. बचपन से उनकी रुचि संगीत में रही है. किशोर अवस्था में वे नाचा के युग पूरूष दाऊ मंदराजी के साथ जुड़ गए थे. बाद में वे राजनाँदगाँव के ही कई आर्केस्टा पार्टी से भी जुड़े रहे. 70 के दशक में उनकी मुलाकात लोककला के पुरोधा दाऊ रानचंद्र देशमुख से हुई. यहीं से उन्होंने अपने जीवन की एक नई शुरुआत की. देशमुख जी के चंदैनी-गोंदा में वे बतौर संगीत निर्देशक काम करने लगे. इसके बाद उन्होंने गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया के साथ मिलकर अनेक सुपरहीट गाने दिए. खुमान साव ने अंचल के कितने ही कवियों और गीतकारों की रचनाओं को अपने संगीत से लयबद्ध किया. इसमें कवि द्वारिका प्रसाद तिवारी ‘विप्र’, स्व. प्यारे लाल गुप्त, स्व. हरि ठाकुर, स्व. हेमनाथ यदु, पं. रविशंकर शुक्ल, लक्ष्मण मस्तुरिया, पवन दीवान एवं मुकुंद कौशल के गीत शामिल रहे हैं

Author: Vikas Parakh