चक्रधर समारोह

इतिहास/ कला - सस्कृति, छत्तीसगढ़, समसामयिक

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर शास्त्रीय नृत्य और संगीत के 32वें अखिल भारतीय आयोजन  ’चक्रधर समारोह’ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में राजा चक्रधर सिंह के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा साहब ने अपना सम्पूर्ण जीवन कला साधना के लिए समर्पित कर दिया और नवोदित कलाकारों को प्रोत्साहित कर उन्हें आगे बढ़ाया। डॉ. सिंह ने कहा-राजा चक्रधर सिंह ने शास्त्रीय नृत्य कथक की रायगढ़ शैली का विकास किया, जिसे देश के कला जगत में ’रायगढ़ घराना’ के नाम से पहचाना जाता है। मुख्यमंत्री ने राजा चक्रधर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन में अपनी प्रस्तुति देने के लिए आए कलाकारों का अभिनंदन किया और समारोह की सफलता की कामना की। समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने रायगढ़ में राजा चक्रधर सिंह के नाम पर ’चक्रधर कला केन्द्र’ की स्वीकृति प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में नृत्य और संगीत के नवोदित कलाकारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

   रायगढ़ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है आजादी के पहले रायगढ़ एक स्वतन्त्र रियासत था, जहां सांस्कृतिक-साहित्यिक गतिविधियों का फैलाव बड़े पैमाने पर था प्रसिद्द संगीतज्ञ कुमार गन्धर्व और हिन्दी के पहले छायावादी कवि मधुकर पांडेय रायगढ़ से ही थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से जब रियासतों के भारत में विलीनीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो रायगढ़ के राजा चक्रधर विलीनीकरण के सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पहले राजा थे राजा चक्रधर एक अच्छे तबला वादक थे और संगीत तथा नृत्य में निपुण थे| उनके प्रयासों और प्रोत्साहन के चलते यहाँ संगीत तथा नृत्य की नई शैली विकसित हुई थी।  आजादी पूर्व से ही गणेशोत्सव के समय यहाँ सांस्कृतिक आयोजन की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई थी,जिसमें रियासत की जनता की मुखर भागीदारी होती थी यह आयोजन एक बड़े मेले का रूप ही ले लेता था राजा चक्रधर ने इस परंपरा को और आगे ही बढ़ाया था। उनकी याद में चक्रधर समारोह के नाम से यहाँ के संस्कृतिकर्मियों तथा कलासाधकों ने वर्ष 1985 से दस दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव शुरू किया इस पूरे उत्सव का आयोजन आम जनता के सहयोग से ही किया गया। चक्रधर समारोह शीघ्र ही राष्ट्रीय महत्त्व के सांस्कृतिक आयोजन के रूप में प्रतिष्ठित हो गया इसके जन-महत्व को देखते हुए तब के मध्यप्रदेश शासन ने दस में से दो दिनों के आयोजन का भार अपने कन्धों पर लिया तथा कुशलता पूर्वक इसका निर्वाह भी किया।  वर्ष 2000 में इस समारोह के राष्ट्रीय महत्त्व को देखते हुये नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य के शासन ने जब दस-दिवसीय आयोजन को शासकीय मान्यता दी राज्य निर्माण के 5साल के बाद तक इस समारोह की ख्याति और ज्यादा फ़ैली तथा देश के सांस्कृतिक मानचित्र में छत्तीसगढ़ को स्थापित करने में इससे बड़ी मदद मिली

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