भोरमदेव अभ्यारण्य मे बाघ रहवास अब राष्ट्रीय उद्यान

योजनाएं
भोरमदेव अभ्यारण्य मे बाघ रहवास अब राष्ट्रीय उद्यान
भोरमदेव अभ्यारण्य मे बाघ रहवास अब राष्ट्रीय उद्यान

छत्तीसगढ़ में अभी तीन टाइगर रिजर्व क्रमश: इंद्रावती अचानकमार एवं सीतानदी उदंती है। भोरमदेव चौथा टाइगर रिजर्व होगा जबकि गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के साथ तमोर पिंगला अभ्यारण्य के कुछ हिस्से को मिलाकर एक और टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भी है। टाइगर रिजर्व की घोषणा के साथ अब आने वाले समय में करीब 358 वर्ग किमी मे फैले भोरमदेव अभ्यारण्य का कायाकल्प होगा और बाघों के रहवास के रूप में इसका विकास होगा।
कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव अभ्यारण्य न केवल बाघों के लिये जाना जाता है बल्कि यहां प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर है एवं यहां बैगा जनजाति भी है। इसके अलावा अभ्यारण्य क्षेत्र में छोटी बड़ी 11 नदी नालों का उद्गम स्थल भी है। अन्य अभ्यारण्यों की तरह यहां घने जंगल के साथ वन्य प्राणी भी बहुतायत में है। पिछले महीने राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में इसे टाइगर रिजर्व बनाने का ऐलान किया गया है।
भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रेदश एवं अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है। इसलिये यह क्षेत्र बाघों के लिये भी एक कारीडोर है जहां बरसात एवं ठंड में इनका आना जाना भी लगा रहता है। ऐसी स्थिति में भोरमदेव में रहवास क्षेत्र का विकास हुआ तो बाघों के लिये बेहद सुरक्षित जगह होगा।

एक उत्तर दें