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राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी, कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) करेगी आयोजन
अभी सिर्फ तीन एजेंसी की परीक्षा को कॉमन बनाया जा रहा है
नई दिल्ली / केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी देते हुए कहा कि एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग सेक्टर में नौकरी के लिए अब एक साथ प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। खासतौर पर महिलाओं को अब बड़ी राहत महसूस होगी।
इस प्रक्रिया के लागू होने से भर्ती, चयन प्रक्रिया और नौकरी मिलना भी आसान हो जाएगा। केंद्र सरकार में लगभग 20 से अधिक भर्ती एजेंसियां हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते वक्त सरकारी नौकरियों के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी बनाने के प्रस्ताव की घोषणा की थी।
यह कंप्यूटर बेस्ड ऑनलाइन परीक्षा होगी। देश के हर जिले में इसके लिए एक सेंटर बनेगा। सरकारी नौकरी के लिए दो वर्ष तक चलने वाली चयन प्रक्रिया अब कुछ ही महीने में पूरी होगी। एक साथ ढाई करोड़ युवा सरकारी नौकरी की परीक्षा दे सकेंगे। यह परीक्षा ‘बी’ और ‘सी’ ग्रुप के पदों के लिए होगी।
इस प्रारंभिक परीक्षा का फायदा यह रहेगी कि इसमें अच्छा स्कोर लेने वाले आवेदक इन्हीं ग्रुप की दूसरी परीक्षाओं के लिए स्वत: ही योग्य बन जाएंगे। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी जो परीक्षा लेगी, उसका परिणाम तीन साल तक मान्य रहेगा। तीन साल तक किसी अभ्यार्थी को उक्त ग्रुप में नौकरी लेने के लिए दोबारा से प्रारंभिक परीक्षा नहीं देनी होगी।
मौजूदा परीक्षा प्रणाली में आती रही हैं अनेक दिक्कतें
मौजूदा परीक्षा प्रणाली में संस्थागत तौर पर कई सारी दिक्कतें सामने आती रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारों में अलग-अलग भर्ती बोर्ड होते हैं। सभी बोर्ड या आयोग अपने तरीके से विभिन्न पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड का तरीका बिल्कुल अलग है। एसएससी अपने तरीके से विभिन्न पदों पर भर्ती करती है।
बैंकिंग सेक्टर ने भी अपने यहां भर्ती के लिए अलग से नियम बना रखे हैं। इन संस्थानों की भर्ती प्रक्रिया में तय मापदंडों का अभाव रहा है। खासतौर पर रेलवे और बैंकिंग सेक्टर की नौकरियों में महिला एवं पुरुष आवेदकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीण क्षेत्रों की काबिल महिलाएं चाहकर भी टेस्ट नहीं दे पाती थीं। अगर परीक्षा केंद्र कई सौ किमी दूर है तो उन्हें कई बार सोचना पड़ता था। साथ कौन जाएगा, कहां ठहरेगा। ऐसे कई सवाल होते थे जो आखिर में परिवार को इस निष्कर्ष पर पहुंचा देते थे कि छोड़ो अगली बार परीक्षा दे देना।
117 विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे
एनआरए की आयोजित की जाने वाली सामान्य पात्रता परीक्षा के लिए हर जिले में परीक्षा केंद्र स्थापित होगा। 117 विशेष परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। वे अपनी पसंद का सेंटर चुन सकेंगे। हालांकि दूसरे आवेदकों को भी पसंद का सेंटर देने का विकल्प दिया गया है।
एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन, तीनों की प्रारंभिक परीक्षा एक साथ होगी। तीनों एजेंसियों की प्रारंभिक परीक्षा का मापदंड भी एक ही रहेगा। विभिन्न भाषाओं में टेस्ट संभव हो सकेगा। वर्तमान प्रणाली में आवेदकों को अपने घर से बहुत दूरी पर परीक्षा केंद्र अलॉट होता है। जैसे पंजाब का परीक्षार्थी पश्चिम बंगाल या मुंबई में जाकर परीक्षा देने जाता है।
ऐसे में उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एनआरए देश के 700 से अधिक जिलों में परीक्षा केंद्र स्थापित करेगी। केंद्र सरकार के पास पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर और तकनीकी स्टाफ है। केंद्र सरकार में ‘बी’ और ‘सी’ ग्रुप के 1.25 लाख पदों पर भर्ती होती हैं। ढाई करोड़ से ज्यादा आवेदक इन परीक्षाओं में भाग लेते हैं। इस तरह की पचास भर्ती परीक्षाएं हर साल आयोजित होती हैं।
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में डेढ़ से दो साल का समय लगता है। कई परीक्षाएं तो ऐसी हैं, जिन्हें चार साल भी लग जाते हैं। अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच होती है। ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया लटक जाती है। कोर्ट में मामला जाता है तो रिजल्ट आने में देरी होती है।
आवेदक एक साथ ही कई परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा दे सकेगा
सीईटी, सामान्य परीक्षा से आवेदकों की छंटनी करेगी। परीक्षा में बैठने वाले आवेदकों को उनके अंकों के आधार पर एक स्कोर दिया जाएगा। यह स्कोर विभिन्न भर्ती एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा। जब फाइनल चयन प्रक्रिया शुरू होगी तो इस स्कोर को देखा जाएगा। आवेदक एक साथ ही कई परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा दे सकेगा।

प्रस्ताव पर सभी से मांगी गई राय
कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने एक बयान में बताया कि ग्रुप ‘बी’, ग्रुप ‘सी’ के कुछ पद और सहायक सरकारी संगठनों में इन्हीं पदों पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए सामान्य पात्रता परीक्षा कराने के लिए एक विशिष्ट एजेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कदम किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को समान अवसर देगा, साथ ही परीक्षा कराने वाली सरकारी एजेंसियों और परीक्षा में शामिल होने वालों के लिए भी ये किफायती होगा। वहीं मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर दूसरे मंत्रालयों, भारत सरकार के विभागों, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और अन्य पक्षों खासकर सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों से भी जवाब मांगा है।
सरकारी डाटा
सरकार के हाल के डाटा के अनुसार एक मार्च, 2018 तक केंद्र सरकार के विभागों में कुल 6,83,823 रिक्त पदों में से, 5,74,289 पद ग्रुप सी, 89,638 ग्रुप ‘बी’ और 19,896 पद ग्रुप ‘ए’ के हैं। हर साल करीब 1.25 लाख पदों के लिए लगभग 2.5 करोड़ छात्र अलग-अलग परीक्षाओं में बैठते हैं, जिन्हें अलग-अलग एजेंसियां आयोजित करती हैं।

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