कोविड महामारी के लिए कई समाधान प्रस्तुत

राष्ट्रीय समसामयिक

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) हाल के दिनों में बदलाव के दौर से गुजरा है। कुछ स्वायत्त संगठनों ने एक महीने के भीतर कोविड महामारी के विभिन्न पहलुओं के लिए कई समाधान प्रस्तुत किये हैं। इनमें से कुछ समाधान निजी कंपनियों और स्टार्टअप के सहयोग से विकसित किये गए हैं। डीएसटी की स्थापना 3 मई 1971 को नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ), यूएसए के मॉडल पर की गई थी। विभाग न केवल धनराशि मुहैया कराता है, बल्कि नीतियां भी बनाता है तथा अन्य देशों के साथ वैज्ञानिक कार्यों को लेकर समन्वय स्थापित करता है। ।
‘निधि’ – यह स्टार्टअप्स के लिए एक एंड टू एंडयोजना है। इसके तहत पिछले पांच सालों में इनक्यूबेटरों और स्टार्टअप्स की संख्या दोगुनी हो गयी है।
‘मानक’ – पूरे देश में सालाना 10 लाख स्कूली बच्चों को नवाचार के लिए प्रेरित करता है। बच्चे अपने विचारों को प्रोटोटाइप में बदलने के लिए प्रोत्साहितहोते हैं। नवाचार और उद्यमिता के जरिये बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे उन्हें अपने विचारों की शक्ति को पहचानने और उपयोग करने में मदद मिलती है।
‘साथी’ – शिक्षा जगत से उद्योग जगत को जोड़ने के लिए बनाये गए 125 करोड़ रुपये की लागत से प्रत्येक साथी केंद्र का निर्माण किया गया है। प्रत्येक केंद्र में एमएसएमई और स्टार्टअप की जरूरतों के लिए समर्पित उपकरण उपलब्ध हैं जिनकी मदद से प्रोटोटाइप तेजी से विकसित किये जा सकते हैं।
डीएसटी नए और उभरते क्षेत्रों में देश को भविष्य के लिए तैयार करने में सहायता प्रदान कर रहा है। इन उभरते क्षेत्रों में शामिल हैं– साइबर– फिजिकल सिस्टम्स,संचार, कंप्यूटिंग, कला, नेशनल मिशन औन क्वांटम साइंस, विज्ञान प्रौद्योगिकी और इसके अनुप्रयोग, सुपरकंप्यूटिंग मिशन आदि। इसके साथ-साथ सतत विकास, इंटेलीजेंट मशीनों के उदय और जलवायु परिवर्तन जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भीअनुसंधानकिये जा रहे हैं। कोविड–19 संकट में भविष्य के लिए डीएसटी की ताकत और तैयारियों का परीक्षण हुआ है।

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