खाद्य विभाग – सार्वभौम पीडीएस

छत्तीसगढ़ योजनाएं

खाद्य विभाग के 4 प्रमुख मूलभूत दायित्व हैं-
1. गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए पीडीएस का संचालन
2. किसानों के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी
3. आम उपभोक्ताओं के लिए सही मात-तौल की वस्तुएं उपल्ध कराना
4. उपभोक्ताओं के 6 अधिकारों के संरक्षण संबंधी कार्य शामिल है।
सार्वभौम पीडीएस
छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनिमय 2012 की प्रस्तावना में राज्य के निवासियों के लिए खाद्यान्न की पात्रता का उल्लेख किया गया है, जबकि इसी अधिनियम में अनेक श्रेणी के परिवारों को राशनकार्ड के लिए अपात्र घोषित किया गया था। इस प्रकार इस अधिनियम की प्रस्तावना तथा धारा 15 की उपधारा 4 के प्रावधान परस्पर विरोधी है।
सार्वभौम पीडीएस के अंतर्गत सामान्य परिवारों (आयकरदाता एवं गैर आयकरदाता) को भी खाद्यान्न प्रदान किया जायेगा। इसके क्रियान्वयन हेतु सामान्य एपीएल परिवारों के राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रचलित है तथा अब तक 8.18 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा 5.38 लाख राशनकार्ड बनाए जा चुके हैं। इन राशनकार्डों में 17.16 लाख सदस्य शामिल हैं। एपीएल राशनकार्डों पर 1 सदस्य वाले परिवार को प्रतिमाह 10 किलो, 2 सदस्य वाले परिवार को प्रतिमाह 20 किलो तथा 3 सदस्य 3 से अधिक सदस्य वाले परिवार को प्रतिमाह 10 रुपए किलो की दर से 35 किलो चावल की पात्रता होगी?
खाद्य सुरक्षा से लाभान्वितों की संख्या में वृद्धि
राज्य में वर्तमान में प्रचलित 58 लाख राशनकार्ड में शामिल 2.16 करोड़ व्यक्तियों अर्थात राज्य की 85 प्रतिशत जनसंख्या को रियायती दर पर चावल का वितरण किया जा रहा है। सार्वभौम पीडीएस के लागू होने के उपरांत राज्य की 92 प्रतिशत जनसंख्या के पीडीएस से लाभावित होने का अनुमान है।
वर्तमान में प्रचलित 58.56 लाख राशनकार्डों में नए सदस्यों के नाम जोडऩे के कार्य को एक व्यापक अभियान के रूप में इस वर्ष राशनकार्ड नवीनीकरण के दौरान किया जा रहा है तथा अब तक 3.57 लाख नए सदस्यों के नाम राशनकार्ड में जोड़े जा चुके हैं। अब तक 8.18 लाख एपीएल राशनकार्ड के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा इनके जरिए लगभग 20 लाख नए सदस्यों को भी लाभ होने का अनुमान हैं।
सामान्य एपीएल परिवार को लाभ
पिछली सरकार द्वारा वर्ष 2012 में इस अधिनियम को प्रस्तुत करते समय सामान्य परिवार हेतु प्रतिमाह 15 किलो चाव की पात्रता रखी गई थी, जिसे अप्रैल 2015 मेें समाप्त कर दी गई। प्रदेश में कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं है और जिन्हें खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता है। सार्वभौम पीडीएस के लागू होने से लगभग 8.25 लाख एपीएल परिवारों को इससे लाभ मिलेगा।
प्राथमिकता वाले परिवारों की पात्रता में वृद्धि
प्राथमिकता वाले राशनकार्डों पर खाद्यान्न की पात्रता में वृद्धि की गई है। यह माह अगस्त 2019 से प्राथमिकता वाले राशनकार्ड हेतु एक सदस्य वाले परिवार को 10 किलो, 2 सदस्यवाले परिवार को 20 किलो, 3 से 5 सदस्य वाले परिवार हेतु 35 किलो तथा 5 से अधिक सदस्य वाले परिवार के लिए प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य हेतु 7 किलो अतिरिक्त चावल का वितरम किया जा रहा है।
सभी राशनकार्डधारियों को केरोसिन का प्रदाय
पूर्व में राज्य के ऐसे 12.90 लाख राशनकार्डधारी परिवार जिनके पास एलपीजी कनेक्शन है, उनकी केरोसिन पात्रता समाप्त कर दी गई थी, उन्हें माह अगस्त 2019 से केरोसिन का वितरण पुन: प्रारंभ कर दिया गया है।
चना वितरण
राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में माडा क्षेत्र में अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों के भोजन में प्रोटीन की कमी पूरा करने हेतु रियायती दर 4 रुपये प्रतिकिलो की दर पर प्रतिमाह 2 किलो चना प्रदाय अंत्योदय एवं प्राथमिकता राशनकार्डधारी परिवार को किया जा रहा है।
राशनकार्ड नवीनीकरण
खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रचलित 36.56 लाख राशनकार्ड का नवीनीकरण 3 महीने की रिकार्ड समय सीमा में पूर्ण कराया गया।
पूर्व में प्रचलित राशनकार्डों में मृत सदस्यों का नाम नहीं हटाया गया था, उसे राशनकार्ड नवीनीकरण में ऐसे 41452 राशनकार्डोंं को परीक्षण उपरांत निरस्त किया गया है। राशनकार्ड में नाम जोडऩे से वंचित लगभग 16.50 लाख नये सदस्यों को राशनकार्ड नवीनीकरण में जोड़ा गया है।
समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन
खरीफ वर्ष 2018-19में सहकारी समितियों को धान बेचने वाले सभी 15.71 लाख किसानों को 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की राशि का भुगतान किया गया है।
राज्य गठन से लेकर अब तक समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की सर्वाधिक खरीदी खरीफ वर्ष 2018-19 में की गई है।
इस वर्ष प्रदेश के 15.71 लाख किसानों से 80.38 लाख टन धान की खरीदी गई है और उन्हें 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 20,095 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है। जबकि खरीफ वर्ष 2017-18 में 12,06 लाख किसानों से 56.88 लाख टन धान की खरीदी की गई, जिसकी राशि 10,597 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया गया।
समर्थन मूल्य पर खरीदे गये धान की कस्टम मिलिंग
खरीफ वर्ष 2018-19 में धान खरीदी के साथ साथ धान की कस्टम मिलिंग कराकर त्वरित निराकरण की भी कार्यवाही की गई है। समर्थन मूल्य पर खरीदे गये धान की कस्टम मिंलिग के लिए धान का पूर्ण उठाव हो गया है। धान की कस्टम मिलिंग उपरांत भारतीय खाद्य निगम में 23.46 लाख टन चावल तथा नागरिक आपूर्ति निगम में 29.62 लाख टन चावल कुल 53.08 लाख टन चावल का उपार्जन किया गया जो खरीदे गये धान के कुल निर्मित होने वाले चावल का 98.57 प्रतिशत है। जबकि खरीफ वर्ष 2017-18 में इसी अवधि तक 38.18 लाख टन चावल का उपार्जन किया गया था। समर्थन मूल्य पर खरीदे गये धान की कस्टम मिलिंग से नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा उपार्जित चावल का उपयोग राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में उपयोग किया जा रहा है।
गुड़ वितरण
बस्तर संभाग में सभी जिलों के अंत्योदय एवं प्राथमिकता वाले राशनकार्डों में शामिल सदस्यों को एनीमिय से बचाने के उद्देश्य से गुड़ वितरण किया जावेगा। ऐसे परिवारों को प्रति माह 2 किलो गुड़ का वितरण शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। इन परिवारों को 17 रुपये प्रतिकिलो की दर पर गुड़ प्रदाय किया जावेगा।
प्लाइंट आफ सेल डिवाईस के माध्यम से राशन सामग्री का वितरण
पीडीेस की राशन सामग्री के वितरण में पारदर्शिता तथा हितग्राही को अस्थायी प्रवास के दौरान राशन सामग्री प्राप्त करने की सुविधा देने हेतु हमारी सरकार द्वारा सभी उचित मूल्य दुकानों का पाईट आफ सेल उपकरण तथा आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से राशन सामग्री के वितरण के लिए कार्यवाही की जा रही है जो आगामी वर्ष तक पूर्ण कर ली जावेगी।

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