प्लाज्मा थेरेपी, COVID-19 के उपचार में सहायक

विविध

COVID-19 के लिए अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं खोजा गया है. लेकिन वायरस के प्रसार को निष्क्रिय करने वाली वैक्सीन, प्रमुख एंटीजन्स के एंटीबॉडीज, मोनोक्लोनल और आरएनए आधारित वैक्सीनों के विकास में भी प्रगति दर्ज की गई है. कुछ स्थानों पर कंवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी या    प्लाज्मा थेरेपी भी शुरू कर दी गई है.

प्लाज्मा

रक्त का तरल हिस्सा प्लाज्मा है. यह पानी और प्रोटीन से बना होता है. यह लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को शरीर के माध्यम से प्रसारित करने के लिए एक माध्यम प्रदान करता है. इसमें इम्युनिटी के महत्वपूर्ण घटक एंटीबॉडी भी होते हैं

एंटीबॉडी

एंटीबॉडी हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाला एक प्रोटीन है.

प्लाज्मा थेरेपी

रोगजनक शरीर पर हमला करते हैं, तो इम्यून सिस्टम काम करना शुरू कर देता है और संक्रमण से लड़ने के लिए प्रोटीन एंटीबॉडी निकालता है. यह एंटीजन नामक बाहरी हानिकारक तत्वों से लड़ने में मदद करता है. एंटीबॉडीज एंटीजन के साथ जुड़कर एंटीजन को बांध देते हैं और साथ ही इनको निष्क्रिय भी कर देते हैं. एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में हजारों की संख्या में एंटीबॉडी होते हैं. यदि संक्रमित व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का उत्पादन करता है, तो वह एंटीबॉडी द्वारा खुद ही ठीक हो जाएगा

प्लाज्मा थेरेपी में COVID-19 से ठीक हुए व्यक्ति का रक्त, जो कि एंटीबॉडी में समृद्ध है, अन्य गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है. इसके तहत ठीक हो चुके लोगों के प्लाज्मा को मरीजों से ट्रांसफ्यूज किया जाता है. सीरम को अलग किया जाता है और वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी के लिए जांच की जाती है. सीरम जिसमें एंटीबॉडीज हैं को COVID-19 के रोगी को दिया जाता है, जिनमें गंभीर लक्षण पाए जाते हैं . मरीज पर एंटीबॉडी का असर होने पर वायरस कमजोर होने लगता है. इसके बाद मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है. असामयिक या हल्के लक्षणों वाले व्यक्ति में इम्युनिटी जल्दी विकसित होती है. इसके विपरीत इम्युनिटी गंभीर रूप से बीमार COVID-19 रोगियों में बाद में विकसित होती है.

प्लाज्मा दान करने की प्रक्रिया में लगभग एक घंटे लगते हैं प्लाज्मा के डोनर्स को एक छोटे उपकरण से जोड़ दिया जाता है, जो प्लाज्मा को निकालता है, साथ ही साथ लाल रक्त कोशिकाओं को उनके शरीर में लौटाता है. वहीं नियमित रक्त दान के दौरान, डोनर्स को दान करते वक्त के बीच लाल रक्त कोशिकाओं की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. प्लाज्मा के मामले में, इसे बार-बार दान किया जा सकता है, यानी कि सप्ताह में दो बार.एंटीबॉडी से समृद्ध प्लाज्मा को COVID -19 से ठीक हुए मरीजों से लिया जाता है और फिर अन्य संक्रमित कोरोनावायरस रोगियों के रक्त प्रवाह में संचारित किया जाता है. जब शरीर बैक्टीरिया या कीटाणुओं जैसे बाहरी रोगजनकों के संपर्क में आता है, तो यह स्वचालित रूप से एक रक्षा तंत्र शुरू करता है और एंटीबॉडी को जारी करना शुरू कर देता है.

 

 

 

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