बस्तर ओलंपिक -‘लयांग-लयोर करसाना़ पण्डुम’

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कांकेर जिले में अब हर साल होगा आयोजन

तहसील मुख्यालय भानुप्रतापपुर में जिला स्तरीय शारीरिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक क्रीडा प्रतियोगिता का आयोजन 07 से 09 फरवरी तक आयोजित किया गया। जिसमें हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी व कॉलेज स्तर के छात्र-छात्राएं अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बस्तर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण इस खेल का नाम गोडी भाषा में ‘लयांग-लयोर करसाना़ पण्डुम’ रखा गया है। इस खेल प्रतियोगिता में- दौड़ 100 मीटर, 200मीटर, 400मीटर, 800मीटर, रिलेरेस, तवा फेंक, गोला फेंक, लम्बी कूद, ऊंची कूद, तिरदाजी, एथलैटिकस, वॉलीबाल, खो-खो, निबंध, चित्रकला, वाद-विवाद इत्यादि खेल-कूद प्रतियोगिता के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रहसन, एकल नृत्य, सामूूहिक नृत्य इत्यादि प्रस्तुत किये गए। 17 वर्षो बाद इस प्रकार के आयोजन भानुप्रतापपुर में हुआ है, जिसमें सभी लोगों ने अपनी भागीदारी निभाई है। इस खेल प्रतियोगिता में कांकेर जिले के सभी सातो ब्लाक मुख्यालय से स्कूल से बालक 442, बालिका 497, कर्मचारी 165, भृत्य 65, कॉलेज के लगभग 300 विद्यार्थी कुल 1500 है। वहीं फुगड़ी,बोरा दौड़, तीरनंदाजी पहली बार रखा गया है। वहीं दौड़ 100,200,400, 800 मीटर, खो खो, कब्बडी, बालीबाल सहित कई खेल शामिल है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हए। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वार्षिक परीक्षा के बाद मार्च-अप्रैल माह में बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जाएगा। ‘लयांग-लयोर करसाना पण्डुम’ में शामिल सभी युवाओं एवं छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि कांकेर जिले में हर साल इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे।

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