भारत जलवायु आपदाओं से तीसरा सर्वाधिक प्रभावित देश

राष्ट्रीय समसामयिक

नई दिल्ली/ दुनिया में बदलते मौसम के कारण प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं। इंटरनेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन डे के मौके पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले दो दशकों में आपदाएं 75 फीसदी बढ़ी हैं। आपदाओं का सर्वाधिक सामना कर रहे देशों में चीन, अमेरिका के बाद भारत तीसरे नंबर पर है। रिपोर्ट के अनुसार चीन, अमेरिका के बाद भारत जलवायु आपदाओं के मामले में तीसरे नंबर पर है। चीन में करीब 600, अमेरिका में 467 तथा भारत में 300 से ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं दर्ज की गई हैं। अन्य देशों में फिलीपींस, इंडोनेशिया, जापना, वियतनाम, मैक्सिको, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान शामिल हैं। इस प्रकार बीते दो दशकों में आपदाओं की संख्या में बढ़ोतरी के साथ-साथ जानमाल की क्षति भी बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार उपरोक्त अवधि के दौरान जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं 3656 से बढ़कर 6681 हो गई। जबकि बाढ़ की घटनाएं दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ी हैं। ये 1389 से बढ़कर 3256 रिकॉर्ड की गईं। आंधी-तूफान की घटनाएं 1457 से बढ़कर 2034 हो गई। रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक आपदाएं मौसम से संबंधित हैं। सबसे ज्यादा 44 फीसदी मामले बाढ़ के हैं जो सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं। ज्यादा बारिश होने से बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। दूसरे नंबर पर आंधी-तूफान के मामले 22 फीसदी दर्ज किए गए हैं। अत्यधिक गर्मी से जुड़ी आपदाएं छह फीसदी, भूस्खलन तथा सूखा पांच-पांच फीसदी तथा जंगलों की आग के मामले तीन फीसदी हैं। आपदा के नौ कारणों में सिर्फ तीन कारण भूकंप, ज्वालामुखी और जन आंदोलन ही तीन ऐसे कारण हैं जो मौसम से नहीं जुड़े हैं।
किन इनकी हिस्सेदारी कुल आपदाओं में 10 फीसदी से भी कम है। 90 फीसदी मामले किसी ना किसी रूप में जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं।
विनाश को न्योता:
संयुक्त राष्ट्र के डिजास्टर रिस्क से जुड़े प्रतिनिधि मामी मिजुटोरी ने कहा कि इन घटनाओं का विश्लेषण करने के बाद सिर्फ यह कहा जा सकता है कि हम जानबूझकर विनाश को न्योता दे रहे हैं क्योंकि राजनीतिक और बिजनेस समुदाय इस खतरे को नजरंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेंडई फ्रेमवर्क के तहत-तहत प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सभी देशों को वर्ष 2020 तक योजना लागू करनी है, लेकिन अभी तक 93 देशों ने इसकी तैयारी की है।
दो दशकों में आपदाओं के मामले
बाढ़ 3254
आंधी-तूफान 2043
भूकंप 552
चरम तापमान 432
भूस्खलन 376
सूखा 338
जंगलों में आग 238
ज्वालामुखी 102
जन आंदोलन 13

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