मुख्यमंत्री बघेल ने 17 मई को लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर केन्द्र को दिए महत्वपूर्ण सुझाव

छत्तीसगढ़ समसामयिक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 17 मई को समाप्त होने वाले लॉकडाउन के उपरांत आगे की रणनीति के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 मई को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्रियों से लॉकडाउन के बाद आगे की रणनीति पर सुझाव मांगे थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में सुझाव देते हुए लिखा है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए व्यापारिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को सावधानी बरतते हुए पुनः प्रारंभ किया जाना आवश्यक है। इसके लिए कंटेनमेंट जोन को छोड़कर शेष सभी क्षेत्र में आवश्यक के साथ-साथ गैर आवश्यक वस्तुओं की बिक्री की अनुमति दी जानी चाहिए। वाहनों की बिक्री करने वाले समस्त प्रकार के शोरूम एवं वर्कशाप संचालन की अनुमति हो। समस्त प्रकार के ई-कामर्स के लिए अनुमति दी जा सकती है। होटल व्यवसाय को फिजिकल डिस्टेंस के पालन की शर्तों के तहत केवल रहवासी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अनुमति दी जा सकती है। होटलों में संचालित रेस्टोरंेट, बार, स्पा इत्यादि को अभी अनुमति न दी जाए। इसी प्रकार व्यक्तिगत रूप से सेवाएं देने वाले सभी प्रकार के टेक्नीशियन, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, मिस्त्री इत्यादि के लिए अनुमति दी जानी चाहिए साथ ही उनको अपने टूल्स, उपकरण एवं अन्य सामग्री के लिए दुकान संचालन की भी अनुमति देनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि नगरीय क्षेत्रों में भी समस्त प्रकार के निर्माण कार्य हेतु अनुमति फिजिकल डिस्टेंस के पालन की शर्त पर देनी चाहिए। इसके लिए श्रमिकों के परिवहन की व्यवस्था के लिए पास की अनुमति होना अनिवार्य किया जा सकता है। राज्यों को उनके विभिन्न जिलों को रेड जोन, ऑरेंज जोन एवं ग्रीन जोन में वगीकृत करने का अधिकार होना चाहिए। इसके लिए पारदर्शी मापदंड केन्द्र सरकार निर्धारित करे। उन्होंने लिखा है कि अंतर्राज्यीय सीमाओं को अभी खोलना उपयुक्त नहीं होगा। अंतर्राज्यीय परिवहन केवल फंसे हुए श्रमिकों एवं अन्य श्रेणीयों के व्यक्तियों के लिए होना चाहिए। इन व्यक्तियों के आने की सूचना राज्यों के बीच साझा की जानी चाहिए ताकि क्वारेंटीन सहित अन्य आवश्यक उपाय किए जा सकें। गैर आवश्यक अंतर्राज्यीय परिवहन पर 15 जून तक प्रतिबंध रखना फिलहाल आवश्यक है। केवल अत्यावश्यक कारणों से अनुमति सहित परिवहन होना चाहिए। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त नई ट्रेने केवल संबंधित राज्यों की सहमति से ही चलायी जानी चाहिए।
इसी प्रकार वायु मार्ग से व्यक्तियों का परिवहन केवल फंसे हुए व्यक्तियों के लिए होना चाहिए। सामान्य एवं गैर आवश्यक कारणों से आने-जाने की अनुमति अभी दिया जाना उपयुक्त नही होगा। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को फिलहाल स्थगित रखा जाना उपयुक्त होगा।

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