राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

राष्ट्रीय समसामयिक

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में देश भर के 22 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें से दो बच्चे जम्मू और कश्मीर से भी शामिल हैं। गैर सरकारी संस्था भारतीय बाल कल्याण परिषद (इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर) ने इन पुरस्कारों की घोषणा की थी। वीरता पुरस्कार प्राप्त किए 22 बच्चों में 10 लड़कियां व 12 लड़के शामिल हैं। एक बच्चे को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया गया।
भारतीय बाल कल्याण परिषद पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप के कारण बीते साल बाल विकास मंत्रालय ने खुद को इन पुरस्कारों से अलग कर लिया था। इस कारण बीते साल से इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर (आईसीसीडब्ल्यू) ही पुरस्कार दे रही है।
पुरस्कारों के बदले गए नाम
वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए बच्चे गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा नहीं होंगे। आईसीसीडब्ल्यू ने इस साल से पुरस्कारों के नाम भी बदल दिए हैं। पहले संजय चोपड़ा, गीता चोपड़ा, बापू गेधानी नाम से पुरस्कार दिए जाते थे। इस बार से इनके स्थान पर मार्कंडेय पुरस्कार, ध्रुव पुरस्कार, अभिमन्यु पुरस्कार, प्रह्लाद पुरस्कार, व श्रवण नाम से पुरस्कार दिया गया।
पुरस्कार में नकद राशि व पढ़ाई में वित्तीय मदद मिलती है
भारत पुरस्कार के तहत 50 हजार, चार पुरस्कारों के तहत 40 हजार रुपये की राशि व अन्य बच्चों को 20 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। इसके अलावा परिषद पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है।
केंद्र सरकार देती है प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार
उल्लेखनीय है कि अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देती है। इसमें इनोवेशन, समाज सेवा, स्कूल संबंधी, कला-संस्कृति, खेल व बहादुरी के तहत बच्चों का चयन किया जाता है।
छत्तीसगढ़ की कांति सिंग व भामेश्वरी को मिला राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार
छत्तीसगढ़ की दो बेटियों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिया गया। एक सरगुजा जिले के मोहनपुर गांव और दूसरी धमतरी जिले के कानडबरी गांव की रहने वाली हैं। इनकी बहादुरी की कहानी भी रोंगटे खड़ी कर देनी वाली है। एक बेटी ने अपनी छोटी बहन को बचाने हाथियों के दल से भीड़कर मौत के मुंह से उसे निकाल लाई, वहीं दूसरी ने गांव की दो बच्चियों की जान बचाने तालाब में छलांग लगा दी। जबकि उसे खुद तैरना नहीं आता था।

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