रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक आयुर्वेदिक सर्वज्वरहर चूर्ण (काढ़ा)

छत्तीसगढ़ समसामयिक

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक आयुर्वेदिक सर्वज्वरहर चूर्ण (काढ़ा) गरियाबंद जिले के केशोडार में भूतेश्वर हर्बल वन धन केन्द्र की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा 10 जड़ी बूटियों को मिलाकर तैयार किया गया है। यह आयुर्वेदिक सर्वज्वरहर चूर्ण कोरोना वायरस से बचाव में काफी मददगार होगा।
गरियाबंद के महिला समूह द्वारा यह चूर्ण सौंठ, काली मिर्च, पीपली, लौंग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, दाल चीनी, जायफल, जावित्री एवं तुलसी पत्र के मिश्रण से तैयार किया गया है। इस चूर्ण का उपयोग करने के लिए 10 मिली लीटर पानी उबालने के बाद उसमें डेढ ग्राम चूर्ण मिलाकर पानी उबालना बंद कर 10 मिनट के लिए रखने के बाद इसे छानकर पिया जा सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इस चूर्ण का न्यूनतम तीन दिनों का तक सेवन करना होगा। इस वन धन केन्द्र की महिलाओं द्वारा अश्वगंधा से तैयार नवायष चूर्ण, पुनर्नवा चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, सतावरी चूर्ण, कौंच चूर्ण, तुलसी चूर्ण, महाविषगर्भ तेल, भृंगराज तेल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। केटलाग में इन उत्पादों के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई है। जड़ी बूटियों के मिश्रण से केशोडार में भूतेश्वर हर्बल वन धन केन्द्र की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार यह चूर्ण इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
इस संकट के समय में श्री भंवर लाल दुगर आयुर्वेद विश्व भारती, महाविद्यालय की रसायन शाला ने इसे प्रमाणित किया है। आयुष मंत्रालय नई दिल्ली के अनुसार यह कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होगा। यह नुस्खा 800 वर्ष प्राचीन आयुर्वेद की परिवार परंपरा से मिला है। यह सर्वज्वरहर चूर्ण मियादी बुखार सहित सभी प्रकार के बुखार, भूख की कमी, सिरदर्द, स्वांस में संक्रमण, दुर्बलता, कफ एवं खांसी में बहुत लाभकारी है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

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