विकास परख अक्टूबर अंक प्रकाशित

छत्तीसगढ़ विचार समसामयिक

सम्पादकीय / आलेख

प्रतियोगिता की तालाबंदी

देश में कोरोना संक्रमण के चलते मार्च के अंतिम सप्ताह से मई मध्य तक पूर्ण लॉकडाउन (तालाबंदी) केंद्र सरकार द्वारा किया गया। इस तालाबंदी मुख्य कारण था, पहला इस संक्रमण या महामारी को लेकर जनता के बीच जागरुकता की कमी और खतरे से अंजान होना था और दूसरी बात सरकार की इस संक्रमण से लडऩे और इलाज करने की न तो अस्पतालों में व्यवस्था न ही सरकार इस महामारी के लिए मानसिक तैयार थी। लगभग डेढ़ महीने के लॉकडाउन के चलते केंद्र सरकार जब जनता को जागरुक करने और महामारी से लडऩे अस्पतालों को तैयार करने में सक्षम हो गयी तब धीरे-धीरे तालाबंदी को खोलने की प्रक्रिया शुरु हुई। कई चरणों में तालाबंदी खोली गई। अब कह सकते हैं सिनेमाहॉल, बड़ी संभाएं, होटल, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र को छोड़कर लगभग जीवन से जुड़ी सभी कार्य तैयार की तरह होने लगे हैं। अनलॉक करने के हर चरण में इस बात की उम्मीद होती थी कि राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग संस्थाएं भी शुरु की जाएंगीं। लेकिन अब तक ऐसा हो न सका। गौर करने वाली बात यह है कि 12वीं कक्षा के बाद होने वाले नीट और जेईई की परीक्षा भी सफलतापूर्वक हो गई। लेकिन कोचिंग कक्षाएं अब तक बंद हैं। यह विचारणीय है कि स्नातक के बाद जो युवा पढऩे जाना चाहता है उसकी जागरुकता इतनी है कि वह स्वयं को सुरक्षित और दूसरों को भी संक्रमण से बचाने में सक्षम है। इसलिए कोचिंग कक्षाओं को अतिशीघ्र तालाबंदी से मुक्त करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़ी संख्या में युवा कोचिंग कक्षाओं के माध्यम से रोजगार प्राप्त करते हैं। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों के ऐसे युवा जो स्वयं परीक्षा की तैयारी करने के साथ इन कोचिंग कक्षाओं में जुड़े होते हैं। इससे उनका गुजारा चलता है। दूसरी बात कोचिंग के बंद होने से तैयारी करने वाले उम्मीदवार भी अपने-अपने घरों में कैद हो गए हैं। उन्हें नौकरी करनी नहीं है क्योंकि वे सरकारी सेवा जाने के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और तैयारी घर में रहकर ठीक से हो नहीं हो रही है। इस तरह युवाओं के अंदर प्रतियोगिता की ललक कमजोर पड़ रही है। उन्हें घर में रहते हुए अपने बेरोजगार होने का एहसास हो रहा है, निराशा हो रही है। यही वजह है कि युवा मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं, यहां तक कि आत्महत्या कर रहे हैं। युवा को नौकरी कोरोना महामारी के संकट के समय मिले न मिले, कोचिंग कक्षाओं में जाकर जब उन्हें शासकीय सेवा में जाने की उम्मीद के साथ
दूसरे युवाओं से प्रतियोगिता करेंगे तो उनका उत्साह बढ़ेगा।

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