विकास परख अप्रैल अंक प्रकाशित

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय समसामयिक

विश्वसनीय पीएससी
भारत की केंद्र व राज्य सरकारें अपने काम काज को पारदर्शी बनाने और जनता के बीच संदेश देने के लिए विश्वसनीय शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। हमारे संविधान में अनेक ऐसी संस्थाएं हैं, जिनको विश्वसनीय बनाएं रखने के लिए कठोर प्रावधान किए गए हैं। जिससे जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार अपने बहुमत के दम पर ऐसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और अधिकारों के साथ छेड़छाड़ न कर सकें। ऐसी संस्थाओं में न्यायपालिका, चुनाव आयोग, नियंत्रक महालेखक परीक्षक और संघ व राज्य लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाएं प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग अपने गठन के बाद लगातार चर्चाओं में बना रहा है। लेकिन यह चर्चा उसके अच्छे कामकाज के लिए कम, आरोप और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर ज्यादा हुई है। वर्ष 2००3 और 2००5 की राज्य सेवा परीक्षा लंबे समय तक न्यायालय में लटकी हुई थी। इस दौरान पूरे देश में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की छवि बहुत खराब हुई थी और प्रदेश के युवाओं का मोह भी राज्य सेवा परीक्षा के प्रति भंग हो गया था। 2००8 के बाद खासकर 2०12 से लोक सेवा आयोग की स्थिति में सुधार आया। परीक्षा कलेण्डर तैयार हुआ, समय पर परीक्षाएं होने लगी, परिणाम भी समय रहते आने लगे और परीक्षा में गड़बड़ी होने की शिकायत नगण्य हो गई। इससे राज्य के युवाओं में फिर से विश्वास जगा और उत्साह से राज्य की सेवा करने की इच्छा रखते हुए उन्होंने प्रतियोगिता की तैयारी जोर-शोर शुरु कर दी। हालांकि परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों की शुद्धि और मॉडल ऑन्सर की गलतियों को लेकर अनेक विवाद भी हुए, लेकिन बहुत हद तक उन्हें शांत कर दिया गया। अभी पिछले एक-डेढ़ वर्ष में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग एक बार फिर अपनी गलतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। न्यायिक परीक्षा हो, व्याख्याता या प्राध्यापक की भर्ती हो या राज्य सेवा परीक्षा किसी न किसी कारण से प्रकरण उच्च न्यायालय तक पहुंच रहे हैं, जिससे परीक्षा स्थगित हो रही है, परिणाम में विलंब हो रहा है और परीक्षार्थियों के मन में भ्रम की स्थिति बन रही है। हाल में राज्य सेवा परीक्षा 2०2० के प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। परिणाम के पूर्व प्रारंभिक परीक्षा के अनेक प्रश्नों के मॉडल उत्तर गलत पाए गए और उन्हीं गलत उत्तर वाले प्रश्नों को शामिल कर मैरिट सूची बना दी गई। कुछ प्रश्न तो ऐसे थे, जिन्हें विशेष ज्ञान न रखने वाला व्यक्ति भी बता सकता है कि इसका उत्तर क्या होगा। फिर आयोग द्वारा चिन्हित विषय विशेषज्ञों से गल्तियां क्यों नहीं पकड़ी जा सकी? सालों मेहनतकर अपना भविष्य दाव पर लगा, युवा पीएससी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, उन्हें अपनी गलती के बजाए आयोग की गलती के कारण असफलता हाथ लगे तो निराशा और गुस्सा स्वाभाविक है। कुछ माह पूर्व वन सेवा परीक्षा के विज्ञापन में भी त्रुटि थी। उच्च न्यायालय ने उस संबंध में निर्देश भी दिए, लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी वह परीक्षा लंबित है। वैसे तो आयोग स्वायत्त है इसलिए उन्हें स्वयं अपनी विश्वसनीयता बनाएं रखने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। भारत युवाओं का देश है, सुनहरा सपना लेकर जो युवा परिश्रम कर रहा है, वह युवा जब व्यवस्था से ठगा महसूस करेगा तो उसका परिणाम समाज और देश भी भुगतना पड़ेगा।

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