विकास परख जनवरी अंक प्रकाशित

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय विशेष समसामयिक
Page 1

नववर्ष-नवसंकल्प

समय का पहिया चलता रहता है। घंटा, दिन, महीना और साल निरंतर परिवर्तनशील है। दिसंबर माह के अंत आते-आते मन इस बात को लेकर प्रसन्न होता है कि साल बीत रहा है और एक नया साल आने वाला है। नये साल मनाने के दुनिया भर में अपने तरीके हैं। यूरोपीय देशों में यह विशेष रुप से मनाया जाता है। भारत अंग्रेजों की गुलामी के दौरान यूरोपीय कलेण्डर को अपनाया और अपने विक्रम संवत् या शक् संवत आधारित पंचांग को छोड़कर ग्रेग्रेरियन कलेण्डर को मानने लगा। सो भारत एक ऐसा देश है जहां साल में दो बार नया वर्ष मनाया जाता है। पहला दिसंबर के बाद जनवरी के प्रथम दिन और दूसरा चैत्र माह की शुरुआत से वर्ष प्रतिपदा के रुप में। हम नये साल को लेकर जितना उत्साहित होते हैं क्या उसका कोई ठोस कारण भी होता है? या केवल एक मौज-मस्ती का अवसर है, जिसे दुनिया मनाती है और हम भी उस रंग में रंग जाते हैं। दरअसल हर गुजरने वाला वर्ष एक अतीत बन जाता है और हर आने वाला वर्ष भविष्य के लिए उम्मीद। इसलिए नये वर्ष के पूर्व बीते हुए वर्ष का व्यक्तिगत जीवन में आत्मनिरीक्षण करना जरूरी होता है। उस पूरे काल में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक या देश के संदर्भ में कुछ खुशियां देने वाली घटनाएं होती हैं, तो दूसरी ओर कुछ पीड़ा देने वाली दुर्घटनाएं भी घटती हैं। हम जब आत्मनिरीक्षण करे तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अपनी क्षमता और योग्यता के अनुरुप हमारे बिताए हुए पल स्वयं के लिए और परिवार, समाज के लिए कितना सार्थक रहा है। खासकर युवा वर्ग जिन्हें अपना भविष्य गढऩा है। उन्हें तो प्रत्येक वर्ष के अंत में बीते हुए वर्ष का स्व:मूल्यांकन अवश्य करना चाहिए। जो संकल्प हमने नए वर्ष में लिए थे, उन संकल्पों को जीवन में उतारने और तय किए हुए लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में हम कितना प्रगति किए, हासिल किए और कितना शेष है। इनका परीक्षण कर आने वाले वर्ष के संकल्प को और दृढ़ करने से सुनहरे भविष्य गढ़े जा सकते हैं। वर्ष कोई एक तत्व नहीं है, वह तो पल-प्रतिपल बिताए गए समय का योग है। इसलिए किसी पल हमने अपने संकल्प को भूलाकर दिग्भ्रमित हुए हो या अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर आगे बढऩे में शिथिल हुए हो, उसका परिणाम वर्ष के अंत में दिखने लगता है। वैसे भी वर्ष 2020 कोरोना महामारी के चलते प्रत्येक व्यक्ति, समाज और देश को आर्थिक रुप से प्रभावित किया है। भविष्य की अनिश्चितता से हर व्यक्ति प्रभावित रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने जीवन को अनेक सीख भी दी है। इनसे शिक्षा लेकर आगामी वर्षों की योजना बनाने की आवश्यकता है। जब कठिन काल होता है तो वह अधिक परिश्रम और धैर्य मांगता है।
आने वाला वर्ष आपके जीवन में कठिनाई कम करने वाला और फलदायी हो, यही शुभकामनाएं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *