विकास परख मई अंक प्रकाशित

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय समसामयिक

कोरोना महामारी हमारा कर्तव्यPage 1

अभी की पीढिय़ां केवल पुस्तकों में यह पढ़ती रहीं कि 19वीं शताब्दी एवं 2०वीं शताब्दी के पहले दूसरे दशक में किस प्रकार दुनिया में महामारी फैली और लाखों-करोड़ों लोगों की मृत्यु का कारण बनी। हमें इस बात का अभिमान भी होता था कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया और देश के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान में इतनी प्रगति कर ली है कि अब दुनिया उस तरफ लाखों-करोड़ों के मृत्यु का कारण बनने महामारियों से मुक्त हो गई है। पिछले वर्ष के प्रारंभ में चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस ने इस पीढ़ी के सभी भ्रम को दूर कर दिया। प्रगति के इतने रुप और रंग है कि विज्ञान लाख कोशिश करें लेकिन प्रकृति की विकृति की सभी संभावनाओं को समाप्त नहीं कर सकता। कोरोना महामारी के शुरुआत के समय देश इससे लडऩे तैयार नहीं था। अत: संक्रमण के प्रकरण कम थे लेकिन लोगों में भय था। सरकार ने भी अपने इंतजाम के लिए पूरे देश में लगभग दो महीने का लॉकडाउन लगा दिया था। इसके बाद कोरोना वायरस के इलाज की व्यवस्था अच्छी हो गई है संक्रमण ने अपने चरमबिंदु को छू लिया और साथ साथ इसका टीका भी तैयार हो गया। इन कारणों से लोगों ने मान लिया कि कोरोना वायरस अब उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। पिछले महीने वायरस ने मनुष्य के इस भ्रम को तोड़ दिया खासकर भारत में। दूसरे चरण में यह वायरस इतना घातक सिद्ध हुआ कि सारा विज्ञान और तमाम व्यवस्थाएं लाचार होकर देखती रही और हम अपनों को खोते रहे। देश में प्रतिदिन 4 लाख से अधिक संक्रमित आने लगे, छत्तीसगढ़ जैसे कम आबादी वाले राज्य में प्रतिदिन 15 हजार से अधिक संक्रमितों की संख्या हो गई, इससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई, अस्पतालों में बिस्तर, आक्सीजन सिलेंडर, वंैटिलेटर, दवाईयां कम पडऩे लग गई। इस अव्यवस्था के लिए हम सरकारी तंत्र को तो कोस सकते हैं, लेकिन व्यक्ति और समाज अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। सितंबर में जब पहले चरण का संक्रमण अपने चरमबिंदु पर था और धीरे-धीरे प्रकरण कम होने लगे तब लोगों में लापरवाही शुरु हुई, वैज्ञानिकों और डाक्टरों ने हमेशा सावधान किया कि मास्क लगाएं और लोगों से दूरी बनाएं, लेकिन समाज ने उनके निर्देशों की अवहेलना की। दूसरे चरण में जो भयावह स्थिति बनी है, उससे हमें सबक लेना चाहिए कि कोई भी वायरस बहुत आसानी से हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा, इसलिए हमें अपने, अपने परिजनों और समाज के प्रति कुछ कत्र्तव्य का पालन करना है। पहला जल्द से जल्द टीका लगाएं, भीड़-भाड़ से बचे, मास्क लगाएं और दूरी का पालन करें। हमारा कत्र्तव्य यह भी है कि जरूरतमंदों की जिस प्रकार सेवा कर सकें करें। क्योंकि इतिहास जब लिखा जाएगा तो प्रत्येक व्यक्ति से यह पूछेगा कि आपने संकट के समय अपने किस कत्र्तव्य का पालन किया।

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