चित्रकोट में प्रकृति गढ़ती है पिंडी

बस्तर के विशाल चित्रकोट के नीचे से प्राप्त पिण्डियों से बस्तर सहित विभिन्न जिलों में 1000 से अधिक शिवालय बन चुके हैं। इसे कुड़ुक जाति के ग्रामीण घाटी से एकत्र करते हैं और उन लोगों को ससम्मान भेंट कर देते हैं जो शिवालय बनाने जा रहे हैं। इंद्रावती नदी पर चित्रकोट जलप्रपात के नीचे पानी […]

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5 शक्तिपीठों में से एक है छत्तीसगढ़ की बिलाई माता

शहर के अंतिम छोर पर दक्षिण दिशा में अधिष्ठात्री मां बिलाई माता का मंदिर स्थित है। वर्षों पुराने इस मंदिर को लेकर कई जनश्रुतियां प्रचलित हैं। इनकी उत्पत्ति के संबंध में मार्कण्डेय पुराण देवीमाहा 11/42 में उल्लेख है। मंदिर के संदर्भ में दो जनश्रुति प्रचलित है। पहली जनश्रुति के अनुसार मूर्ति की उत्पत्ति या तो […]

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प्रकृति से जुड़े आदिवासी खानपान में बढ़ा लेते हैं इम्युनिटी

कोरोना वायरस के संकट के दौर में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बढाने के लिए तरह तरह के उपाय कर रहे हैं। इधर बस्तर के आदिवासियों का सामान्य खान पान ऐसा है कि उन्हें इम्युनिटी बढाने के लिए अलग से प्रयास करने […]

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छत्तीसगढ़ के हरिहर वैष्णव ने बस्तर के लोक साहित्य को संजोने में लगा दिया जीवन

बस्तर का लोक साहित्य बेहद सशक्त और समृद्ध रहा पर यह सब सदियों तक स्रुति परंपरा में ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होता रहा। बदलते जमाने के साथ काफी कुछ विलुप्त भी हो गया। बस्तर में कई साहित्यकार हुए जिन्होंने बस्तरिया साहित्य की समृद्ध विरासत को संजोने में अपना जीवन खपाया। इन्हीं […]

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प्राचीन भित्ति चित्रकला

देश में कई ऐसी गुफाएं मिलती हैं जिनमें प्रागैतिहासिक काल की भित्ति चित्रकला के दर्शन होते हैं। बस्तर में भित्ति चित्रकला की परंपरा रही है। बस्तर के भित्ति चित्रकारों में प्रमुख नाम है बेलगुरराम मंडावी का। नारायणपुर जिले के गढ़बेंगाल गांव बेलगुरराम के प्रयासों से चित्रकला का केंद्र बनकर उभरा है। उनकी चित्रकला ने दुनियाभर […]

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13 साल बाद जी उठी संकरी नदी

कवर्धा शहर को छूकर निकलने वाली नदी संकरी में 13 साल बाद पानी नजर आ रहा है। पिछले 13 साल से नदी नवंबर में ही सूख जाती थी। नदी को जिंदा करने आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम ने नदी को जीवित करने योजना बनाई गई। जिले में नदी के किनारे पहले गांव चौरा से लेकर […]

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त्रिवेणी संगम: महानदी-सोढ़ूर-पैरी

माघ मेला- राजिम के ऐतिहासिक माघ पूर्णिमा का मेला पूरे भारत में प्रसिध्द है। इस पवित्र नगरी के एतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मन्दिरों में प्राचीन संस्कृति और शिल्पकला का अनोखा समन्वय नजर आता है। 14 वीं शताब्दी में बना ‘भगवान रामचंद्र का मन्दिर’, जगन्नाथ मन्दिर, भक्तमाता राजिम मन्दिर, और सोमेश्वर, महादेव मंदिर, श्रृध्दालुओं के […]

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रतनपुरिहा गम्मत

छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य में छत्तीसगढ़ी लोककथात्मक संवादों का स्वीकार और पृष्ठभूमि व वातावरण निर्माण के अनुरूप लोकगीतों, लोकनृत्यों एवं लोकवाद्यों का समाहार है। बाबू रेवराम का कृष्णलीला पर आधारित विशेषत: रास-केंद्रित गुटका ‘रतनपुरिहा गम्मतÓ के रुप में लोकनाट्य का लोकप्रिय स्वरुप है। इसका स्थान वही है जो जगनिक के ‘आल्हाÓ व ईसुरी के बुन्देली फाग गीता […]

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