छत्तीसगढ़ में आज भी जीवित है सिंधु घाटी सभ्यता की मूर्ति बनाने की कला

ढोकरा कला के माध्यम से पुश्तैनी हुनर को बढ़ा रहे आगे पूरण रायपुर / छत्तीसगढ़ में हजारों साल पहले की मूर्ति बनाने की कला आज भी जीवित है। यहाँ के शिल्पकार धातुओं में बारीक दस्तकारी कर अनोखी कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान मूर्ति बनाने की ये कला […]

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रतनपुर : सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मंदिरों और धार्मिक स्थलों का केंद्र रूप से समृद्ध शहर है

  रतनपुर  बिलासपुर से कटघोरा पाली मार्ग पर 25 कि॰ मी॰ कि दूरी पर स्थित है। रतनपुर बस स्टैंड के पास स्थित हाथी किला केन्द्रीय पुरातत्व के संरक्षण में है । यह किला राजा पृथ्वी देव ने बनाया था। यह चारों ओर खाईयों से घिरा हुआ है। किले में 4 द्वार सिंह द्वार, गणेश द्वार, […]

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बस्तर के आदिवासियों की ’देसी थर्मस’ बनाने की तुम्बा कला को सहेज रहे जगतराम

रायपुर / बस्तर के आदिवासियों की जीवनशैली और परंपरा अनेक कलाओं को समेटे हुए है। इस कला ने गीत ओर संगीत से जुड़े कलाकार कैलाश खेर को भी दीवाना बना दिया है। वे इस बात को बखूबी जानते हैं कि एक कला किस प्रकार से सतत आजीवका के विकास में अहम योगदान दे सकती है। […]

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पोरा –छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी का लोकपर्व

छत्तीसगढ़ का पोरा पर्व मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा त्योहार है। खेती किसानी का काम समाप्त हो जाने के बाद भाद्र पक्ष की अमावस्या को यह त्यौहार मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पोला के दिन अन्नमाता गर्भ धारण करती है अर्थात् धान के पौधों में इस दिन दूध भरता है, इसीलिए […]

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छत्तीसगढ़ में कृष्णजन्माष्टमी को आठे कन्हैया के रूप में मनाते हैं

तीज त्यौहार  आस्थाओं और विश्वासों के संवाहक हैं, इसीलिए इनकी अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति के साधन हृदय को अधिक ग्राह्य और आकर्षित करने वाले हैं। छत्तीसगढ़ के लोक त्यौहारों में यह तथ्य और अधिक प्रभावकारी ढ़ंग से मुखरित हुआ है। ऐसा ही एक त्यौहार है जन्माष्टमी का लोकरूप ‘आठे कन्हैया‘। आठे कन्हैया केवल देव आस्था से […]

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लोकपर्व कमरछठ का वैज्ञानिक महत्व

छत्तीसगढ़ का प्रमुख व्रत कमरछठ यानी हल षष्ठी संतान के स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की कामना लेकर माताएं रखती हैं लेकिन इस पर्व का  वैज्ञानिक आधार भी है। इस दिन महिलाएं में केवल महुआ की लकड़ी और महुआ की खरी का ही इस्तेमाल करती हैं। उपवास की सामग्री में महुआ के पत्ते की थाली (पतरी), […]

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गौ संरक्षण का लोक पर्व- बहुलाचौथ

भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर शुक्रवार को बहुला चौथ मनाया जाएगा। महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं। इस व्रत में गाय-बछड़े की पूजा का विशेष महत्व है।  बहुला चतुर्थी व्रत से संबंधित कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं।   इस तिथि में विवाहित महिलाएं अपने पुत्रों की रक्षा के […]

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तुरतुरिया बनेगा ईको टूरिज्म स्पाट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में न केवल प्रभु राम की माता कौशल्या का जन्म हुआ, रामायण के माध्यम से रामकथा को दुनिया के सामने लाने वाले महर्षि बाल्मिकी ने भी इसी भूमि पर आश्रम का निर्माण कर साधना की। प्रदेश सरकार ने कौशल्या के जन्म-स्थल चंदखुरी की तरह तुरतुरिया के बाल्मिकी आश्रम को भी पर्यटन-तीर्थ के रूप […]

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लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर

लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 किमी तथा संस्कारधानी शिवरीनारायण से 3 किमी की दूरी पर बसे खरौद नगर में स्थित है। यह नगर प्राचीन छत्तीसगढ़ के पाँच ललित कला केन्द्रों में से एक हैं और मोक्षदायी नगर माना जाने के कारण इसे छत्तीसगढ़ की काशी भी कहा जाता है। ऐसा माना […]

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पौराणिक कथाओं जैसा सुंदर होगा भगवान राम का ननिहाल

रायपुर. भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गांव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना […]

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