त्रिवेणी संगम: महानदी-सोढ़ूर-पैरी

माघ मेला- राजिम के ऐतिहासिक माघ पूर्णिमा का मेला पूरे भारत में प्रसिध्द है। इस पवित्र नगरी के एतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मन्दिरों में प्राचीन संस्कृति और शिल्पकला का अनोखा समन्वय नजर आता है। 14 वीं शताब्दी में बना ‘भगवान रामचंद्र का मन्दिर’, जगन्नाथ मन्दिर, भक्तमाता राजिम मन्दिर, और सोमेश्वर, महादेव मंदिर, श्रृध्दालुओं के […]

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रतनपुरिहा गम्मत

छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य में छत्तीसगढ़ी लोककथात्मक संवादों का स्वीकार और पृष्ठभूमि व वातावरण निर्माण के अनुरूप लोकगीतों, लोकनृत्यों एवं लोकवाद्यों का समाहार है। बाबू रेवराम का कृष्णलीला पर आधारित विशेषत: रास-केंद्रित गुटका ‘रतनपुरिहा गम्मतÓ के रुप में लोकनाट्य का लोकप्रिय स्वरुप है। इसका स्थान वही है जो जगनिक के ‘आल्हाÓ व ईसुरी के बुन्देली फाग गीता […]

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छत्तीसगढ़ में पहाड़ दान की परम्परा

छत्तीसगढ़ में पहाड़दान की परम्परा है जो अब भौतिकता के विस्तार के साथ लुप्तप्राय हो गई है। यह कोई सिहावा मैकल या दलहा पहाड़ के दान की बात नहीं है। आज अन्न के महोत्सव छेरछेरा पुन्नी पर हम आप सभी से एक लुप्त हो रही परम्परा की जानकारी साझा करते हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ में धान […]

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छत्तीसगढ़ महोत्सव-मेले

प्रदेश के समृध्दशाली संस्कृति और साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग प्रदेश के शासकीय मंदिरों देवालयों तथा समाधियों आदि के रखरखाव एवं जिर्णोध्दार से संबंधित कार्य के साथ-साथ उनके साज-सज्जा एवं धार्मिक स्थलों पर धर्मशाला आदि का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा शासन द्वारा […]

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छत्तीसगढ़ के केन्द्र संरक्षित स्मारक

दन्तेश्वरी मंदिर में रखी प्राचीन प्रतिमाएं, दन्तेवाड़ा चन्द्रादित्य मंदिर, बारसूर, दन्तेवाड़ा गणेश प्रतिमा, बारसूर, दन्तेवाड़ा मामा भांजा का मंदिर, बारसूर, दन्तेवाड़ा महादेव मंदिर, बस्तर, जगदलपुर भैरमदेव मंदिर, भैरमगढ़, बीजापुर दन्तेश्वरी मंदिर, दन्तेवाड़ा काष्ठ निर्मित मृतक स्मृति स्तंभ, डिलमिली, दन्?तेवाड़ा ईंटों का टीला, गढ़धनोरा, कांकेर महापाषाणीय स्मारक(उर्सकल), गमावाड़ा, दन्तेवाड़ा नारायण मंदिर, नारायणपाल, बस्तर कारली महादेव मंदिर, […]

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छत्तीसगढ़ में कबीरपंथ

सर्वविदित है कबीर के शिष्यों की संख्या काफी थी। चार शिष्यों जागू साहेब, भगवान साहेब, श्रुतिगोपाल साहेब और धनी धर्मदास साहेब महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके साथ ही दो और शिष्यों तत्वा और जीवा का नाम भी बड़े आदर के साथ लिया जाता है। संभवत: इन्ही शिष्यों ने मिलकर कबीर के नाम पर कबीर पंथ […]

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राजिम कुंभ अब माघ पुन्नी मेला

राजिम कुंभ छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित राजिम में लगता है। राजिम अपने शानदार मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। महानदी पूरे छत्तीसगढ़ की प्रमुख जीवनदायिनी नदी है। इसी नदी के तट पर बसी है, राजिम नगरी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 45 किलोमीटर दूर सोंढूर, पैरी और महानदी के त्रिवेणी संगम तट पर बसे […]

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अन्नदान का लोकपर्व ‘छेरछेरा’

छेरछरा छत्तीसगढ़ का आंचलिक अभिधान है जिसे लोक पर्व भी कहा जा सकता है। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान प्रदेश है तथा धान की प्रधानता के कारण इस प्रदेश को धान का कठोरा भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्व एवं त्यौहार है- छेरछेरा, हरेली, दसहरा, देवारी आदि. हरेली को हलेरी से समीकृत कर इसका मूल […]

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