छत्तीसगढ़ में कृष्णजन्माष्टमी को आठे कन्हैया के रूप में मनाते हैं

तीज त्यौहार  आस्थाओं और विश्वासों के संवाहक हैं, इसीलिए इनकी अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति के साधन हृदय को अधिक ग्राह्य और आकर्षित करने वाले हैं। छत्तीसगढ़ के लोक त्यौहारों में यह तथ्य और अधिक प्रभावकारी ढ़ंग से मुखरित हुआ है। ऐसा ही एक त्यौहार है जन्माष्टमी का लोकरूप ‘आठे कन्हैया‘। आठे कन्हैया केवल देव आस्था से […]

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लोकपर्व कमरछठ का वैज्ञानिक महत्व

छत्तीसगढ़ का प्रमुख व्रत कमरछठ यानी हल षष्ठी संतान के स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की कामना लेकर माताएं रखती हैं लेकिन इस पर्व का  वैज्ञानिक आधार भी है। इस दिन महिलाएं में केवल महुआ की लकड़ी और महुआ की खरी का ही इस्तेमाल करती हैं। उपवास की सामग्री में महुआ के पत्ते की थाली (पतरी), […]

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गौ संरक्षण का लोक पर्व- बहुलाचौथ

भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर शुक्रवार को बहुला चौथ मनाया जाएगा। महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रखती हैं। इस व्रत में गाय-बछड़े की पूजा का विशेष महत्व है।  बहुला चतुर्थी व्रत से संबंधित कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं।   इस तिथि में विवाहित महिलाएं अपने पुत्रों की रक्षा के […]

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तुरतुरिया बनेगा ईको टूरिज्म स्पाट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में न केवल प्रभु राम की माता कौशल्या का जन्म हुआ, रामायण के माध्यम से रामकथा को दुनिया के सामने लाने वाले महर्षि बाल्मिकी ने भी इसी भूमि पर आश्रम का निर्माण कर साधना की। प्रदेश सरकार ने कौशल्या के जन्म-स्थल चंदखुरी की तरह तुरतुरिया के बाल्मिकी आश्रम को भी पर्यटन-तीर्थ के रूप […]

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लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर

लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 किमी तथा संस्कारधानी शिवरीनारायण से 3 किमी की दूरी पर बसे खरौद नगर में स्थित है। यह नगर प्राचीन छत्तीसगढ़ के पाँच ललित कला केन्द्रों में से एक हैं और मोक्षदायी नगर माना जाने के कारण इसे छत्तीसगढ़ की काशी भी कहा जाता है। ऐसा माना […]

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पौराणिक कथाओं जैसा सुंदर होगा भगवान राम का ननिहाल

रायपुर. भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी का सौंदर्य अब पौराणिक कथाओं के नगरों जैसा ही आकर्षक होगा। राजधानी रायपुर के निकट स्थित इस गांव के प्राचीन कौशल्या मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखते हुए, पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी राम वन गमन पथ विकास परियोजना […]

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चित्रकोट में प्रकृति गढ़ती है पिंडी

बस्तर के विशाल चित्रकोट के नीचे से प्राप्त पिण्डियों से बस्तर सहित विभिन्न जिलों में 1000 से अधिक शिवालय बन चुके हैं। इसे कुड़ुक जाति के ग्रामीण घाटी से एकत्र करते हैं और उन लोगों को ससम्मान भेंट कर देते हैं जो शिवालय बनाने जा रहे हैं। इंद्रावती नदी पर चित्रकोट जलप्रपात के नीचे पानी […]

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5 शक्तिपीठों में से एक है छत्तीसगढ़ की बिलाई माता

शहर के अंतिम छोर पर दक्षिण दिशा में अधिष्ठात्री मां बिलाई माता का मंदिर स्थित है। वर्षों पुराने इस मंदिर को लेकर कई जनश्रुतियां प्रचलित हैं। इनकी उत्पत्ति के संबंध में मार्कण्डेय पुराण देवीमाहा 11/42 में उल्लेख है। मंदिर के संदर्भ में दो जनश्रुति प्रचलित है। पहली जनश्रुति के अनुसार मूर्ति की उत्पत्ति या तो […]

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प्रकृति से जुड़े आदिवासी खानपान में बढ़ा लेते हैं इम्युनिटी

कोरोना वायरस के संकट के दौर में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। लोग रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बढाने के लिए तरह तरह के उपाय कर रहे हैं। इधर बस्तर के आदिवासियों का सामान्य खान पान ऐसा है कि उन्हें इम्युनिटी बढाने के लिए अलग से प्रयास करने […]

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छत्तीसगढ़ के हरिहर वैष्णव ने बस्तर के लोक साहित्य को संजोने में लगा दिया जीवन

बस्तर का लोक साहित्य बेहद सशक्त और समृद्ध रहा पर यह सब सदियों तक स्रुति परंपरा में ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होता रहा। बदलते जमाने के साथ काफी कुछ विलुप्त भी हो गया। बस्तर में कई साहित्यकार हुए जिन्होंने बस्तरिया साहित्य की समृद्ध विरासत को संजोने में अपना जीवन खपाया। इन्हीं […]

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