विकास परख जनवरी अंक प्रकाशित

नववर्ष-नवसंकल्प समय का पहिया चलता रहता है। घंटा, दिन, महीना और साल निरंतर परिवर्तनशील है। दिसंबर माह के अंत आते-आते मन इस बात को लेकर प्रसन्न होता है कि साल बीत रहा है और एक नया साल आने वाला है। नये साल मनाने के दुनिया भर में अपने तरीके हैं। यूरोपीय देशों में यह विशेष […]

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विकास परख नवम्बर अंक प्रकाशित

वयस्क होता छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य अब वयस्क होने की दहलीज पर है, अपनी स्थापना के बीस वर्ष पूरा कर आज इक्कीसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, आर्थिक संरचना और भाषा के कारण प्रकृति ने ही इस क्षेत्र को छत्तीसगढ़ का नाम तो पहले ही दे चुकी थी, किन्तु पृथक […]

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वन्यजीव सप्ताह- 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर

वन्य जीवन प्रकृति की अमूल्य देन है। भारत में विभिन्न प्रजातियों का विशाल भण्डार है, भविष्य में वन्य प्राणियों की समाप्ति की आशंका के कारण भारत में सर्वप्रथम 7 जुलाई, 1955 को ‘वन्य प्राणी दिवस’ मना निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 2 अक्तूबर से पूरे सप्ताह तक वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जाएगा। 1956 से […]

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छत्तीसगढ़ में आज भी जीवित है सिंधु घाटी सभ्यता की मूर्ति बनाने की कला

ढोकरा कला के माध्यम से पुश्तैनी हुनर को बढ़ा रहे आगे पूरण रायपुर / छत्तीसगढ़ में हजारों साल पहले की मूर्ति बनाने की कला आज भी जीवित है। यहाँ के शिल्पकार धातुओं में बारीक दस्तकारी कर अनोखी कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान मूर्ति बनाने की ये कला […]

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भीकाजी कामा : तिरंगे की प्रथम निर्माता

स्वतन्त्र भारत के झण्डे के रूप में जिस तिरंगे को हम प्राणों से भी अधिक सम्मान देते हैं, उसका पहला रूप बनाने और उसे जर्मनी में फहराने का श्रेय जिस स्वतन्त्रता सेनानी को है, उन मादाम भीकाजी रुस्तम कामा का जन्म मुम्बई के एक पारसी परिवार में 24 सितम्बर, 1861 को हुआ था। उनके पिता […]

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बस्तर के आदिवासियों की ’देसी थर्मस’ बनाने की तुम्बा कला को सहेज रहे जगतराम

रायपुर / बस्तर के आदिवासियों की जीवनशैली और परंपरा अनेक कलाओं को समेटे हुए है। इस कला ने गीत ओर संगीत से जुड़े कलाकार कैलाश खेर को भी दीवाना बना दिया है। वे इस बात को बखूबी जानते हैं कि एक कला किस प्रकार से सतत आजीवका के विकास में अहम योगदान दे सकती है। […]

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११ सितम्बर, स्वामी विवेकानंद के संबोधन ने शिकागो धर्म सम्मलेन जीत लिया था

स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में 11 सितंबर, 1893 को आयोजित विश्व धर्म संसद में जो भाषण दिया था उसकी प्रतिध्वनि युगों-युगों तक सुनाई देती रहेगी। आज स्वामीजी के भाषण को 125 साल पूरे हो रहे हैं। शिकागो में दिए भाषण के मुख्य अंश:- मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों! आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम […]

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संविधान निर्माण के महत्वपूर्ण तथ्य

# 9 दिसंबर, 1946 ई० को संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित काउंसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुई. सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्‍यक्ष चुना गया. # मुस्लिम लीग ने बैठक का बहिष्‍कार किया और पाकिस्तान के लिए बिलकुल अलग संविधान सभा की मांग प्रारम्भ […]

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