शराब की बढ़ती खपत के बीच शराबबंदी की पहल 

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भूपेश सरकार प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी आखिर कब लागू करेगी, यह सवाल विपक्ष के साथ साथ शराबबंदी आंदोलन करने वाले संगठन भी कर रहे हैं.   राज्य में पूर्ण शराबबंदी की अनुशंसा के लिए गठित की गई समिति की  पह्ली  बैठक में  समिति के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण शर्मा ने  सदस्यों से पूर्ण शराब बंदी के लिए सुझाव मांगे। श्री शर्मा ने कहा कि शराबबंदी के निर्णय को लागू करने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जाए और जिन राज्यों में शराबबंदी की गई है वहाँ अध्ययन दल भेंजे जाएं।

 शराबबंदी को लेकर एक तरफ कांग्रेस सरकार रणनीति तैयार कर रही है तो वहीं सूबे के लोग सबसे अधिक शराब पीने में जुटे हैं. छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 35 फीसदी से अधिक लोग शराब पीते हैं, जो इस मामले में दूसरे राज्यों से अव्वल है. शराब पीने के मामले में दूसरे नंबर पर त्रिपुरा और तीसरे नंबर पर पंजाब के लोग हैं.
          महाराष्ट्र की आबादी 11.47 करोड़ है, जबकि शराब से कमाई करीब 10546 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष है. वहीं छत्तीसगढ़ की आबादी 2.55 करोड़ है. यहां शराब से कमाई साल 2018-19 में लगभग 4700 करोड़ रुपए हुई है. इस कमाई को आबादी से भाग दें तो छत्तीसगढ़ में शराब की खपत प्रति व्यक्ति 1843 रुपए प्रतिदिन की है. महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 919 रुपए प्रति व्यक्ति है,
        कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र में पूर्ण शराबबंदी का जनता से वादा किया था, लेकिन उस वादे को वह भूल गई है. सरकार शराब बंद तो नहीं कर रही है, बल्कि दुकानें बढ़ाने की कोशिश में है. आबकारी विभाग के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में अभी 701 शराब दुकानें संचालित हैं. इनमें से 377 देशी शराब बेचती हैं और 324 दुकानों से विदेशी शराब बेची जाती है.
    इधर समिति की बैठक में शराबबंदी के लिए अनेक सुझाव सदस्यों ने दिए,  जिनमें राज्यों में पूर्ण शराबबंदी लागू किए जाने के फलस्वरूप राज्यों के वित्तीय ढांचे, अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, शराबबंदी का सामाजिक क्षेत्र में प्रभाव, शराबबंदी लागू करने में आई कठिनाईयां, शराबबंदी के फलस्वरूप राज्यों के कानून व्यवस्था की स्थिति में परिवर्तन-बदलाव, अवैध मदिरा के विक्रय, परिवहन और धारण को रोके जाने संबंधी समानांतर कार्यवाही, अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के समुदायों को नियत सीमा तक शराब के निर्माण एवं धारण के छूट पर शराबबंदी के प्रभाव, औचित्य और सफलता, अनुसूचित क्षेत्रों में शराबबंदी के फलस्वरूप उत्पन्न विधिक परिस्थितियां एवं प्रभाव, शराबबंदी के फलस्वरूप जनस्वास्थ्य पर प्रभाव शराबबंदी के फलस्वरूप पूर्व में नियोजित कर्मचारियों का प्रतिस्थापन और पुनर्नियोजन की व्यवस्था बैठक में पूर्ण शराबबंदी के पूर्व राज्य सरकार द्वारा चलाए गए जनचेतना अभियान एवं उसका प्रभाव तथा सामाजिक अंकेक्षण और राज्य सरकार द्वारा पूर्व से संचालित नशामुक्ति केन्द्रों की कार्यप्रणाली एवं उनकी भूमिका आदि विषय शामिल थे।

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