पी चिदम्बरम भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार

कवर स्टोरी राष्ट्रीय

कांग्रेस ने मामले को राजनैतिक साजिश बताया

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम की मनीलॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस पार्टी इसे राजनैतिक षडयंत्र बता रही है। प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चिदंबरम की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘मोदी सरकार बनने के 6 साल बाद 10 साल पुराने केस में दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया जा रहा है। जेल में बंद एक ऐसी महिला के बयान को आधार बनाया गया है जिस पर अपनी पुत्री की हत्या का आरोप है। 40 साल के बेदाग राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक शुचिता को धूमिल करने के लिए मोदी सरकार ने यह दुर्भावनापूर्ण कैंपेन चलाया है। यह प्रजातंत्र की दिन-दहाड़े और कभी-कभी रात को भी हत्या होते देखा गया है।’
इससे पहले बुधवार की रात सीबीआई ने नाटकीयढ़ंग से पी चिदम्बरम को उनके निवास से गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की दूसरी पारी में टू जी घोटाले के पर्दाफाश होने के बाद सहयोगी पार्टी के नेता ए राजा और कनीमोझी पर दोष मढ़ा गया। तब लगता था कि तत्कालीन घोटालों में कांग्रेस का दामन साफ है लेकिन एयरसेल-मैक्सिस डील की गड़बड़ी सामने आने के बाद मामला बदल गया।

क्या है मामला

निवेश की आड़ में FIPB में चल रहे ‘खेल’ का खुलासा 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दौरान एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच से होनी शुरू हुई। इस डील में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर ही ईडी टीम का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों में पैसे आने पर गया। जब ईडी मामले की तह तक पहुंची तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। INX के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद चिदंबरम पर शिकंजा कसना शुरू हो गया।

INX केस में कब-क्या हुआ 

* INX को विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (FIPB) ने मई 2007 में 4.62 करोड़ रुपये के निवेश के लिए स्वीकृति दी थी।

* FIPB ने यह स्पष्ट किया था कि कंपनी में ‘डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट’ के लिए अलग स्वीकृति की जरूरत होगी। डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट एक भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सब्सक्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए इनडायरेक्ट फॉरन इन्वेस्टमेंट होता है।
* कंपनी ने कथित तौर पर डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट किया था और INX मीडिया में 305 करोड़ रुपये से अधिक का फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट हासिल किया था, जबकि कंपनी को 4.62 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट के लिए ही स्वीकृति मिली थी।
* 15 मई 2017 को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) की अनियमितता के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।
* प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्डरिंग ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया था।

जानें क्या है एयरसेल-मैक्सिस डील

एयसेल-मैक्सिस मामले की जांच के दौरान पता चला कि केवल 180 करोड़ का निवेश दिखाकर 3,500 करोड़ रुपये का निवेश इसलिए कर दिया गया ताकि मामला निवेश से संबंधित कैबिनेट कमिटी के पास नहीं जाए। दरअसल, एफआइपीबी नियमों के अनुसार, वित्त मंत्री को 600 करोड़ रुपये तक के विदेश निवेश को मंजूरी देने का अधिकार था। इससे अधिक के विदेशी निवेश पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होती।

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