रेत उत्खनन करने दो वर्ष का पट्टा दिया जाएगा

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साल शुरू होने के साथ ही नहई सरकार के सामने रेत खदानसे रेत के उत्खनन की समस्या खड़ी हो गई थी। प्रदेश में अब रेत खदानों के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2019 बनाया गया है। पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से रेत खदानों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था में संशोधन करते हुए रेत खदान संचालन के लिए निजी व्यक्ति और संस्था का चयन संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा रिवर्स बिडिंग के आधार पर कराया जाएगा।

एनजीटी ने लगाई थी रोक

सितंबर 2018 में ट्रिब्यूनल ने नदियों से रेत निकालने दी गई अनुमति पर रोक लगा दी थी इस आदेश पर छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 21 दिसंबर 2018 को प्रदेश के सभी कलेक्टरों के नाम निर्देश जारी किया। इसमें रेत निकालने के लिए पूर्व में दी गई अनुमति पर रोक लगाई गई। इसमें केंद्र की नई अधिसूचना जारी होने तक नदियों से रेत खनन नहीं करने को कहा है।

प्रदेश में आदेश का पालन नहीं किया दा रहा था जिस पर हाईकोर्ट ने शासन को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 21 दिसंबर 2018 को जारी निर्देश जिसमें नदियों से रेत निकालने के लिए पूर्व दी गई अनुमति को रोक लगाई है, इसके पालन का आदेश दिया था।

रेत व्यवसायी का पंजीयन अनिवार्य

प्रदेश में वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत रेत खदान संचालनकर्ता को खनिज रेत का मूल्य एवं अन्य प्रभारित करों को खदान क्षेत्र में आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना होगा। साथ ही रेत परिवहन में संलग्न वाहनों तथा रेत व्यवसाय से जुड़े ट्रेडर्स का पंजीयन कराया जाना अनिवार्य होगा। ठेकेदार द्वारा रायल्टी एवं अन्य करों का अग्रिम भुगतान कर खनिज ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से अभिवहन पास जारी किया जाएगा। इसमें चयनित बोलीदार को दो वर्ष के लिए रेत उत्खनन पट्टा का आबंटन किया जाएगा।

इसके तहत् 19 अगस्त 2019 को रायपुर, बिलासपुर, जांजगी-चांपा, रायगढ़, कोरबा, मुंगेली, कांकेर, बलौदाबाजार-भाटापारा तथा अन्य जिलों में कुल 60 रेत खदानों हेतु एन.आई.टी. जारी किया गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ का मूल निवासी ही नीलामी में भाग ले सकता है। रेत उत्खनन में किसी व्यक्ति, फर्म और संस्था का एकाधिकार समाप्त करने के लिए नई व्यवस्था के अंतर्गत किसी एक जिले में मात्र एक खदान समूह तथा पूरे प्रदेश में अधिकतम 5 समूहो में ही रेत खदाने प्राप्त कर सकता है।

पंचायतों से उत्खनन ठेका देने का अधिकार छीना

पुरानी व्यवस्था में गाम पंचायतों द्वारा अवैधानिक तरीके से निजी व्यक्तियों के माध्यम से मशीने लगाकर रेत खदानों को ठेके पर दे दिया गया था। माईनिंग प्लान तथा पर्यावरण सम्मति का पालन ग्राम पंचायतों द्वारा नहीं कराया जा पा रहा था। जिन खदानों में मैन्युल लोडिंग हेतु अनुमति प्रदत्त है, उन खदानों में भी मशीनों द्वारा लोडिंग कराए जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही थी। पंचायतों का खदान संचालन में कोई नियंत्रण नहीं होने से मूल्य वृद्धि के साथ-साथ अव्यवस्था उत्पन्न हो गई थी। पूर्व में पंचायतों द्वारा रेत खदान संचालन से जहां लगभग 13 करोड़ मात्र रायल्टी के रूप में प्राप्त हुआ करता था, वही अब नवीन व्यवस्था से लगभग 200 करोड़ राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। पंचायतों एवं नगरीय निकायों को विगत 5 वर्षों में प्राप्त अधिकतम वार्षिक राशि में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर समतुल्य राशि संबंधित पंचायत तथा नगरीय निकायों को आगामी वित्तीय वर्ष से प्राप्त होगी।

पंचायतों से ज्यादा माफिया उठा रहे थे फायदा

सरकार ने माना कि यूपी, महाराष्ट्र तक रेत माफिया काम कर रहा है? यहां से रेत ले जाकर वहां 13 हजार से 27 हजार रुपए प्रति ट्रक बेचा जा रहा है। रायल्टी की चोरी हो रही है। इससे पंचायतों के राजस्व में वृद्धि नहीं हो रही है। विभाग ने कड़े कदम भी उठाए हैं। पिछले कुछ सालों से छत्तीसगढ़ में रेत खनन का अधिकार पंचायतों को दिया गया था। इसका मकसद पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन इसका फायदा पंचायतों को मिलने के बजाय कुछ माफिया उठा रहे थे। अवैध उत्खनन का काम लगातार चल रहा था। ठेकेदार खुद पर्यावरण विभाग से अनुमति ले रहे हैं। पिछले दिनों खनिज विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी हुई थी।

वर्तमान व्यवस्था के तहत आम जनता को निर्धारित दर पर सुगमता से रेत उपलब्ध हो पाएगा। इससे नदियों एवं जल स्त्रोतों के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संरक्षण के साथ ही उपभोक्ताओं को सुगमता से उचित मुल्य पर रेत उपलब्ध हो सकेगी। शासन को रायल्टी के साथ डी.एम.एफ., पर्यावरण एवं अधोसंरचना उपकर सहित नीलामी राशि (उच्चतम निर्धारित मूल्य एवं न्यनतम बोली के अंतर की राशि) के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। रेत के पट्टों के अनुबंध निष्पादन होने से स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।

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